गाड़ी छूने पर लोग भगा देते थे, आज उसी कार में बैठकर शोरूम पहुंचे फुटपाथ के मासूम


खबर प्रभात न्यूज़ ब्यूरो प्रयागराज 

प्रयागराज: "साहब! जब भी हम किसी की बड़ी गाड़ी को हाथ लगाते थे, तो लोग हमें डांटकर भगा देते थे। आज पहली बार हम कार के अंदर बैठे हैं, बहुत अच्छा लग रहा है।" यह शब्द उन मासूमों के थे जिनके लिए एक कार में बैठना किसी सपने जैसा था, लेकिन मदद फाउंडेशन ने न केवल उनका यह सपना पूरा किया, बल्कि उनके नंगे पांवों को ठंड से राहत भी दिलाई।

नंगे पांवों की चुभन ने झकझोरा

कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच रविवार को जब शहर रजाई में दुबका था, तब 'मदद फाउंडेशन' की टीम अपनी 178वीं 'रविवार की रसोई' के जरिए फुटपाथ पर रहने वालों की भूख मिटा रही थी। इस दौरान फाउंडेशन की राष्ट्रीय महासचिव अमृता तिवारी की नजर उन छोटे बच्चों पर पड़ी, जो सुन्न कर देने वाली ठंड में भी नंगे पैर जमीन पर चल रहे थे।

शोरूम बना खुशियों का ठिकाना

संस्थापक मंगला प्रसाद तिवारी और अमृता तिवारी ने बिना समय गंवाए बच्चों को अपनी गाड़ी में बैठाया। जो बच्चे कल तक लग्जरी कारों को सिर्फ दूर से देखते थे, वे आज उसी में बैठकर शहर के एक बड़े फुटवियर शोरूम पहुंचे। वहां किसी 'स्पेशल गेस्ट' की तरह बच्चों ने खुद अपनी पसंद के जूते और चप्पलों का चुनाव किया। नए जूतों की चमक बच्चों की आंखों में साफ देखी जा सकती थी।

सिर्फ भोजन ही नहीं, सम्मान की भी भूख

फाउंडेशन के संस्थापक मंगला प्रसाद तिवारी ने बताया कि समाज के इस तबके को केवल रोटी और कपड़े की ही नहीं, बल्कि सम्मान और प्यार की भी जरूरत है। बच्चों का गाड़ी में बैठने का उत्साह यह बताता है कि छोटी-छोटी खुशियां उनके लिए कितनी बड़ी बात हैं।

सेवा का अटूट सिलसिला

मदद फाउंडेशन केवल भोजन तक सीमित नहीं है। 

- प्रयागराज में वर्षों से संचालित यह संस्था निराश्रितों को: निशुल्क चिकित्सा शिविर के जरिए स्वास्थ्य लाभ पहुँचाती है।

- जरूरतमंदों को स्वेटर, जैकेट और कंबल वितरित करती है।

- हर रविवार सैकड़ों लोगों तक गरमा-गरम भोजन सुनिश्चित करती है।

इस पुनीत कार्य में अरविंद पांडे, आदर्श पाठक, राजेंद्र पाल और पुनीत श्रीवास्तव सहित पूरी टीम ने अपना सहयोग दिया। बच्चों के माता-पिता ने फाउंडेशन को अपनी दुआएं देते हुए कहा कि जो उनके अपने नहीं कर सके, वह इस संस्था ने कर दिखाया।

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