
नई दिल्ली (आकाश रबीन्द्र शुक्ला):
राजनीति में कब क्या हो जाये ये सोचना मुश्किल होता है लेकिन कभी-कभी ऐसा हो जाता है जिसकी उम्मीद पार्टी को नही होती.जी हाँ आज कुछ ऐसा ही देखने को मिला,हम बात कर रहें है दिल्ली नगर निगम चुनाव की जहाँ केजरीवाल सरकार बुरी तरह से हार गए हैं .
हारने की सबसे बड़ी वजह अरविन्द केजरीवाल के वादे रहें है
जी हाँ आपको ध्यान होगा कि अरविन्द केजरीवाल विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा,नगर निगम तक अपने रटे रटाये वादे दोहराते गए.
उन्होंने जनता से ऐसे वादे किये थे जो उनके अंदर आता ही नही लेकिन फिर भी कर दिए,यही वजह रही जिससे लोगों में पकड़ कम होती गयी.
जी हाँ आपको ध्यान होगा कि अरविन्द केजरीवाल विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा,नगर निगम तक अपने रटे रटाये वादे दोहराते गए.
उन्होंने जनता से ऐसे वादे किये थे जो उनके अंदर आता ही नही लेकिन फिर भी कर दिए,यही वजह रही जिससे लोगों में पकड़ कम होती गयी.
पीएम मोदी पर निशाना: भ्रष्टाचार और लोकपाल के मुद्दे को सामने रखकर अरविंद केजरीवाल की पार्टी सत्ता में आई थी और इसके बाद लगातार उसने केंद्र सरकार पर निशाना साधाकेजरीवाल ने दावा कि कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें काम नहीं करने दे रहे हैं। केजरीवाल के बयानों को दिल्ली की जनता ने काम न करने का एक बहाना मान लिया.
सिर्फ बिजली और पानी की बात: अरविंद केजरीवाल ने जब भी लोगों को अपनी सरकार की खूबियां बताईं तो सिर्फ बिजली और पानी पर बात की। जनता को उन्होंने अपने सरकार के अन्य कामों की जानकारी नहीं दी, जिससे लोगों के बीच उनकी पकड़ ढीली होती चली गई और अंततः एक बड़ी हार का सामना करना पड़ा .
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