बालगोविन्द वर्मा
सिरौली गौसपुर की। मामला तहसील सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के संत कबीर संत भगवान रामशरण महाविद्यालय, बाबापुरवा-डूंडी(लालगंज)बाराबंकी से जुड़ा है। कॉलेज का प्रबंधतंत्र टूटने के कगार पर है। प्रबन्धक के मनमाने रवैये ने कॉलेज की शिक्षण व्यवस्था के साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था को भी बदत्तर कर दिया है। आलम यह है कि जहां पर नए सत्र में लगभग 6 से 7 सौ छात्र- छात्राएं प्रवेश लिया करते थे,आज वहाँ पर बड़ी मुश्क़िल सिर्फ़ सौ से 150 बच्चे ही प्रवेश ले रहे हैं। शिक्षण कक्षों में सीटें नही हैं, धान व गेहूँ की बोरियाँ लगीं हुई हैं।अब ऐसे में बच्चे कहाँ बैठकर पढ़ाई करें।
बतातें चलें कि लगभग एक महीने पहले उपरोक्त महाविद्यालय के प्रबंधक के कार्य व्यवहार से असंतुष्ट होकर कॉलेज के हिन्दी विभाग में प्रवक्ता अनूप सिंह ने अपनी फ़रियाद उच्च शिक्षा उत्थान समिति को सुनाया था। जिसके बदले में समिति ने तत्कालीन जिलाधिकारी बाराबंकी को लिखित शिकायती प्रार्थना-पत्र दिया था। प्रार्थना पत्र प्राप्ति के पश्चात् जिलाधिकारी बाराबंकी द्वारा शिकायतकर्ता की शिकायत को संज्ञान में लेकर मामले की जांच हेतु तहसील स्तर पर बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन अधिकारी स्वामीनाथ मौर्य को नियुक्त किया गया था, लेकिन जांचोपरांत कोई भी स्पष्ट जानकारी न मिलने की वजह से प्रार्थी की समस्या का समाधान नही हो सका था।
उक्त प्रकरण में अब फिर से एकबार कॉलेज के उपप्रबंधक राम सेवक गोस्वामी चेला संत भगवान गोस्वामी ने तहसील स्तर पर कॉलेज के विषय में जानकारी प्राप्त करने हेतु जनसूचना अधिकार अधिनियम-2005 ,के अंतर्गत जानकारी माँगी है।
हमारी टीम ने जब इस विषय में कॉलेज के उपप्रबंधक से बात की तो उन्होंने महाविद्यालय के प्रबंधक विनोद गोस्वामी को भ्रष्टाचार में संलिप्त होकर कॉलेज का निजी लाभ हेतु व्यापारीकरण करने की बात कही है।
अब ऐसे में उन बच्चों का क्या कसूर जिन्होंने इस कॉलेज में एडमिशन ले लिया है। विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित मानकों के पूरा न होने के बावजूद भी ऐसे अनेक कॉलेज हैं जिन्हें स्वयं विश्वविद्यालय ने संबद्धता प्रदान कर रखी है। अब सोंचने वाली बात यह है कि इस पूरी अब्यवस्था का ज़िम्मेदार कौन है? वो बच्चे जिन्होंने ऐसे कॉलेजों में विश्वास करके एडमिशन ले रखा है या वह प्रबंधक जो बिना किसी के भविष्य की चिंता किए सिर्फ मनमाने रवैये के जरिये धन उगाही व व्यापारीकरण कर रहा है या फ़िर वह विश्वविद्यालय प्रशासन जिसने ऐसे कॉलेजों को बिना स्थलीय निरीक्षण किये संबद्धता दे रखी है।
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