मीडिया में जज्बात की कोई जगह नहीं है। संपादक को काम चाहिए और वो आपको करना ही पड़ेगा।

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अलेप्पो में विस्फोट से उत्पन्न भयावक हालात ने जहां एक कैमरामैन के जज्बात से काम लेने पर उसे "नायक" बना दिया। वहीं हिंदुस्तान में ऐसा करोगे तो नौकरी जायेगी। क्योंकि संपादक को काम चाहिए और वो आपको करना ही पड़ेगा। यहां तो बेचारे कैमरामैन पर एक्सक्लूसिव फोटो न लाने पर उल्टी कार्रवाई हो जाती।

आपको याद होगा कुछ दिनों पहले छत्तीसगढ़ CM के कार्यक्रम में एक युवक ने खुद को आग लगा ली थी। उस समय पत्रिका का कोई कैमरामैन वहां था जिसने हर मूमेंट की फोटो खींची और उन फोटोज को वेबसाईट और सोशल मीडिया के जरिये प्रधान संपादक ने एक्सक्लूसिव लिखकर ऐसे वाह-वाही लूटी मानो उसने
इस घटना के जरिये रातोंरात CM बदलवा देगा।

दरअसल संपादक वो बंदा होता है जो आपके अच्छे काम का क्रेडिट खुद रखता है। और अपने बुरे का आपके मत्थे चढ़ा देता है। यही वजह है कि न चाहते हुये भी पत्रकार आजकल चांटूकार बनने मजबूर हैं। क्योंकि घर तो चलाना ही है साहब।
आशीष चौकसे- पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक और ब्लॉगर

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