
पंडित असगर गुजरात के गधे फिर चर्चा में आ गए हैं. और इस बार अखिलेश यादव की वजह से नहीं. बल्कि खुद विज्ञापन की वजह से हैं. इस बार गुजरात टूरिज्म ने ऐसा विज्ञापन बनाया कि उसपर विवाद हो गया है.
यूपी चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए कहा था कि अमिताभ बच्चन जी ‘गुजरात के गधों का’ प्रचार करना बंद कीजिए. इस विज्ञापन में अमिताभ बच्चन गुजरात के कच्छ की ‘वाइल्ड एस सेंक्चुरी’ का प्रचार कर रहे थे कि गुजरात आइए और इन गधों को देखिए, क्योंकि ये गधे सिर्फ गुजरात में मिलते हैं और 70 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से दौड़ते हैं.
गुजरात टूरिज्म की तरफ से जो अब एड बनाया गया है उसमें कहा गया है, ‘आइए और कच्छ के छोटे रण में जंगली गधे के साथ रेस लगाइए.’ इस एड में गलत ये ही है कि उसमें रेस लगाने की बात कही गई है.क्योंकि ये विज्ञापन टूरिस्ट को रेस लगाने के लिए न्योता दे रहा है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक विज्ञापन में दिखाया गया है कि सुपर-चार्ज्ड SUV गधों के झुंड के पीछे दौड़ती है, जो कि दंडनीय अपराध है.
गुजरात में जंगली गधों की संख्या 4 हज़ार 451 है. नेशन बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (NBWL) के मेंबर रहे भानु सिंह चावड़ा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बताया कि विज्ञापन में इस्तेमाल किया गया ‘रेस’ शब्द गलत संदेश देता है. क्योंकि एशियाई जंगली गधा लुप्त हो रहा जानवर है. जो सिर्फ गुजरात में ही है. गायब हो रहे इस जानवर के साथ रेस लगाना उनके लिए खतरनाक हो सकता है. इस दौरान गधा ज़ख़्मी भी हो सकता है.
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का कहना है कि किसी जानवर का इस तरह पीछा करना उसे नुकसान पहुंचा सकता है. किसी जानवर के पीछे ये जानने के लिए गाड़ी दौड़ाना बिल्कुल गलत है कि वो 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से दौड़ सकता है कि नहीं. गुजरात टूरिज्म के एमडी एन श्रीवास्तव का कहना है, ‘कम रेस विद, सिर्फ एक टैग लाइन है. हमें लगता है कि इस लाइन का गलत मतलब निकाला जा सकता है. हम इस विज्ञापन की समीक्षा करेंगे और विज्ञापन में जरूरी बदलाव भी करेंगे.’
क्या है नियम?
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के मुताबिक किसी जानवर को परेशान करने पर 5,000 से 10,000 रुपये के जुर्माना और 2 से छह महीने तक की कैद हो सकती है. जंगली गधा कहिये या फिर घुड़खर, उसको साल 2015 में इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंसर्वेशन ऑफ़ नेचर (IUCN) ने दुर्लभ प्रजातियों में शामिल किया था. सितंबर 2006 से ही ‘लिटिल रण ऑफ़ कच्छ’ यूनेस्को की वर्ल्ड नेचुरल हेरिटेज लिस्ट में शामिल है.
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