जानिए क्यों दिया महर्षि दुर्वासा ने गंगा को श्राप


गंगा नदी का उल्लेख हिंदुओं के सबसे प्राचीन पवित्र ग्रंथ ऋग्वेद से मिलता है. यहां गंगा की स्तुति (ऋग्वेद 10.75) में लिखी हुई है, जिसमें पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों के बारे में बताया गया है.

महर्षि दुर्वासा ने दिया था शाप
मान्यता है कि एक दिन ऋषि दुर्वासा ब्रह्मलोक पहुंचे. वहां अपनी बाल्यवस्था में गंगा भी थीं. महर्षि दुर्वासा वहां स्‍नान करने लगे, तभी हवा का तेज झोंका आया और उनके कपड़े उड़ गए. यह सब देख पास ही खड़ी युवा गंगा अपनी हंसी को रोक नही पाई और जोर से हंस पड़ीं.
गुस्‍से में दुर्वासा ने गंगा को शाप दिया कि वह अपना जीवन धरती पर एक नदी के रूप में व्‍यतीत करेंगी और लोग खुद को शुद्ध करने के लिए उसमें डुबकियां लगाएंगे.

महाभारत में मिलता है उल्लेख
मह्रषि वेदव्यास द्वारा रचित और भगवान गणेश जी द्वारा लिखित पौराणिक ग्रंथ महाभारत में उल्लेख मिलता है कि भरतवंश में शान्तनु नामक बड़े प्रतापी राजा थे. एक दिन गंगा तट पर आखेट खेलते समय उन्हें गंगा देवी दिखाई दीं. शान्तनु ने उससे विवाह करना चाहा. गंगा ने इसे इस शर्त पर स्वीकार कर लिया कि वे जो कुछ भी करेंगी उस विषय में राजा कोई प्रश्न नहीं करेंगे.

शान्तनु से गंगा को एक के बाद एक सात पुत्र हुए. परन्तु गंगा देवी ने उन सभी को नदी में फेंक दिया. राजा ने इस विषय में उनसे कोई प्रश्न नहीं किया.

बाद में जब उन्हें आठवां पुत्र उत्पन्न हुआ तो उसे नदी में फेंकने के बारे में शान्तनु ने आपत्ति जताई. इस प्रकार गंगा को दिया गया उनका वचन टूट गया और गंगा ने अपना विवाह रद्द कर स्वर्ग चली गईं. जाते जाते उन्होंने शान्तनु को वचन दिया कि वह स्वयं बच्चे का पालन-पोषण कर बड़ा कर शान्तनु को लौटा देंगी.

गंगा नदी की कई किंवदंतियां
गंगा की उत्पत्ति के विषय में अनेक किंवदंतियां प्रचलित हैं. मान्यता है कि ब्रह्मा जी के कमंडल से गंगा नाम की देवी प्रकट हुई जिन्हें बाद में गंगा नदी के नाम से जाना गया. वैष्णव मान्यता के अनुसार ब्रह्माजी ने विष्णुजी के चरणों को जब धोया और तब उस जल को अपने कमंडल में एकत्र कर लिया.
यही जल बाद में गंगा नदी के नाम से प्रकट हुआ. कहते हैं कि मां गंगा पर्वतराज हिमालय और उनकी पत्नी मैनिका की पुत्री हैं, इस प्रकार वे देवी पार्वती की बहन भी हैं.

स्कंद पुराण के अनुसार, देवी गंगा कार्तिकेय (मुरुगन) की का पालन किया था. भवनान कार्तिकेय शिव और पार्वती का एक पुत्र है.

इसी तरह ब्रह्म वैवर्त पुराण 2.6.13-95 के अनुसार, भगवान विष्णु की तीन पत्नियां हैं जो हमेशा आपस में झगड़ती रहती है, इसलिए अंत में उन्होंने केवल लक्ष्मी को अपने साथ रखा और गंगा को शिव जी के पास तथा सरस्वती को ब्रह्मा जी के पास भेज दिया.

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