रिपोर्टर- बाल गोविन्द वर्मा।
कोटवाधाम, बाराबंकी।गर्मी का सितम जारी है और इस बार की गर्मी को देखते हुए ऐसा लग रहा है जैसे गर्मी जून महीने तक तांडव नृत्य करके प्रलय ला करके ही रहेगी। सारी धरा पर प्राकृतिक वनस्पतियों से लेकर जीवों तक का हाल बुरा है। पानी की तलाश सभी को है। नहरों से लेकर छोटे-बड़े तालाबों के साथ ही झीलें भी सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। जलीय जीवों का क्या होगा यह तो ईश्वर को ही पता है, लेकिन यह अवश्य है कि जब मनुष्य व अन्य पशुओं आदि को पानी की तलाश में दर-दर भटकना पड़ रहा है तो बेचारे जलीय जीवों का क्या होगा?
बाबा जगजीवन दास साहेब की कर्मभूमि कोटवाधाम के पास अद्रा व अमनियापुर के बीच स्थापित बड़ी झील भी सूख गई है, जिसके चलते पालतू जानवरों को भी पानी पीने व स्नान करने की किल्लत महसूस हो रही है। गाँवों का इतना बुरा है कि इतनी गर्मी के बाद भी नल ठीक नही कराये गए हैं। अब वैसे भी परेशानी थी ऊपर से प्राकृतिक संसाधनों का इस तरह से सूख जाना काफी चिंता का विषय है।
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