
नई दिल्ली दिल्ली के तीनों नगर निगमों में राजनीतिक पार्टियों की किस्मत का फैसला आज होगा। दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में बनाए गए मतगणना केन्द्रों में गिनती जारी है। मतगणना के दौरान पहला रूझान भाजपा के पक्ष में आया है। दोपहर तक तीनों निगमों में राजनीतिक दलों की स्थिति साफ हो जाने की उम्मीद की जा रही है। फिलहाल 270 सीटों के रूझान आ चुके हैं। जिसमें भाजपा 179 और आप 40 कांग्रेस 40 अन्य 10 सीटों पर आगे चल रहे हैं।
Coverage India लाइव अपडेट्स
दक्षिणी दिल्ली
भाजपा - 64
आप- 17
कांग्रेस - 14
अन्य - 7
उत्तरी दिल्ली
भाजपा - 68
आप- 15
कांग्रेस - 18
अन्य - 1
पूर्वी दिल्ली
भाजपा - 41
आप- 8
कांग्रेस - 11
अन्य - 3
बता दें कि निगम चुनावों के लिए 23 अप्रैल को मत डाले गए थे। इसमें 53.58 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों समेत कुल 2537 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनकी किस्मत का पिटारा बुधवार को खुलने वाला है। राज्य निर्वाचन आयुक्त एसके श्रीवास्तव के मुताबिक मतगणना की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कुल 35 जगहों पर मतगणना केन्द्र बनाए गए हैं। जहां पर सुबह आठ बजे से मतदान शुरू किया जाएगा।
नतीजों से तय होगी दिल्ली की दिशा
निगम चुनाव के नतीजों से दिल्ली की राजनीतिक दिशा तय होने की उम्मीद की जा रही है। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में सभी को चौंकाते हुए आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीती थीं। लेकिन, आप का यह जादू अब कम होता दिख रहा है। हाल ही में राजौरी गार्डेन विधानसभा सीट पर हुए उपचुनावों में आप प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई थी। जबकि, कांग्रेस को अपना खोया हुआ वोटबैंक कुछ हद तक वापस होता हुआ दिखा। इस सीट पर जीत भाजपा को मिली। माना जा रहा है कि निगम चुनाव के नतीजों से दिल्ली की वास्तविक राजनीतिक स्थिति का पता चलेगा।
निगम चुनाव के नतीजों से दिल्ली की राजनीतिक दिशा तय होने की उम्मीद की जा रही है। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में सभी को चौंकाते हुए आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीती थीं। लेकिन, आप का यह जादू अब कम होता दिख रहा है। हाल ही में राजौरी गार्डेन विधानसभा सीट पर हुए उपचुनावों में आप प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई थी। जबकि, कांग्रेस को अपना खोया हुआ वोटबैंक कुछ हद तक वापस होता हुआ दिखा। इस सीट पर जीत भाजपा को मिली। माना जा रहा है कि निगम चुनाव के नतीजों से दिल्ली की वास्तविक राजनीतिक स्थिति का पता चलेगा।
दस सालों से निगम की सत्ता में है भाजपा
दिल्ली नगर निगम पर दस वर्षों से भाजपा सत्ता में है। जबकि, कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। पहले वर्ष 2007 से 2012 तक एकीकृत निगम में भाजपा की सत्ता रही है। जबकि, विभाजन के बाद 2012 में हुए चुनावों में भी भाजपा को तीनों निगमों में बहुमत मिला है। इस बार के नतीजों से पहले भी तमाम एक्जिट पोल में भाजपा को बढ़त मिलती हुई दिखाई गई है। इससे जहां भाजपा के हौसले बुलंद दिख रहे हैं, वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इस बयान देने में सावधानी बरत रहे हैं।
दिल्ली नगर निगम पर दस वर्षों से भाजपा सत्ता में है। जबकि, कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है। पहले वर्ष 2007 से 2012 तक एकीकृत निगम में भाजपा की सत्ता रही है। जबकि, विभाजन के बाद 2012 में हुए चुनावों में भी भाजपा को तीनों निगमों में बहुमत मिला है। इस बार के नतीजों से पहले भी तमाम एक्जिट पोल में भाजपा को बढ़त मिलती हुई दिखाई गई है। इससे जहां भाजपा के हौसले बुलंद दिख रहे हैं, वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इस बयान देने में सावधानी बरत रहे हैं।
हर सीट पर है त्रिकोणीय मुकाबला
दिल्ली के तीनों नगर निगमों में कुल मिलाकर 272 सीटें हैं। इनमें से दो सीटों पर चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। जबकि, बाकी 270 सीटों पर तीनों प्रमुख पार्टियों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ है। जबकि, कई वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशियों की ओर से भी कड़ी टक्कर मिली है। इसके चलते ज्यादातर सीटों पर रोचक लड़ाई हुई है।
दिल्ली के तीनों नगर निगमों में कुल मिलाकर 272 सीटें हैं। इनमें से दो सीटों पर चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। जबकि, बाकी 270 सीटों पर तीनों प्रमुख पार्टियों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हुआ है। जबकि, कई वार्ड में निर्दलीय प्रत्याशियों की ओर से भी कड़ी टक्कर मिली है। इसके चलते ज्यादातर सीटों पर रोचक लड़ाई हुई है।
भाजपा के रणनीतिक फैसले की भी परीक्षा
निगम चुनाव से पहले भाजपा ने अपने सभी पार्षदों के टिकट काटने की घोषणा करके सभी को हैरान कर दिया था। माना जा रहा है कि भाजपा पार्षदों के खिलाफ चल रही दस सालों की सत्ता विरोधी लहर को काटने के लिए पार्टी नेतृत्व ने यह फैसला लिया। कई वर्तमान पार्षदों ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा है। जबकि, कुछ पार्षदों द्वारा भितरघात की भी अंदाजे लगाए गए हैं। ऐसे में चुनाव के नतीजे भाजपा नेतृत्व के रणनीतिक फैसले के लिए भी बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं।
निगम चुनाव से पहले भाजपा ने अपने सभी पार्षदों के टिकट काटने की घोषणा करके सभी को हैरान कर दिया था। माना जा रहा है कि भाजपा पार्षदों के खिलाफ चल रही दस सालों की सत्ता विरोधी लहर को काटने के लिए पार्टी नेतृत्व ने यह फैसला लिया। कई वर्तमान पार्षदों ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा है। जबकि, कुछ पार्षदों द्वारा भितरघात की भी अंदाजे लगाए गए हैं। ऐसे में चुनाव के नतीजे भाजपा नेतृत्व के रणनीतिक फैसले के लिए भी बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं।
इकत्तर लाख लोगों ने किया है मतदान
दिल्ली में कुल एक करोड़ 32 लाख मतदाता है। इसमें से 71,39,994 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सबसे ज्यादा मतदान दक्षिणी दिल्ली में हुआ है। यहां पर 26,87,685 लोगों ने मतदान किया। जबकि, उत्तरी निगम में 26,80,011 लोगों ने और पूर्वी निगम में 17,72,298 लोगों ने मत डाले हैं।
दिल्ली में कुल एक करोड़ 32 लाख मतदाता है। इसमें से 71,39,994 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सबसे ज्यादा मतदान दक्षिणी दिल्ली में हुआ है। यहां पर 26,87,685 लोगों ने मतदान किया। जबकि, उत्तरी निगम में 26,80,011 लोगों ने और पूर्वी निगम में 17,72,298 लोगों ने मत डाले हैं।
निगम में रहेगा बहुमत
निगम की 272 सीटों में 138 पर महिलाएं और 134 पर पुरुष रहेंगी। आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तरी एमसीडी में 42 सामान्य प्रत्याशी, 10 महिला एस.सी, 10 एस.सी. और 42 महिला सीटों के लिए मतदान कराया गया था। इसी प्रकार दक्षिणी निगम में 44 सामान्य प्रत्याशी, 8 महिला एस.सी., 7 एस.सी. व 45 महिला और पूर्वी निगम में 26 सामान्य, 2 महिला एस.सी., 5 एस.सी. और 27 महिला सीटों को लिए मतदान कराया गया था। इन सीटों के लिए राष्ट्रीय स्तर की पार्टियों समेत बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे।
निगम की 272 सीटों में 138 पर महिलाएं और 134 पर पुरुष रहेंगी। आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक उत्तरी एमसीडी में 42 सामान्य प्रत्याशी, 10 महिला एस.सी, 10 एस.सी. और 42 महिला सीटों के लिए मतदान कराया गया था। इसी प्रकार दक्षिणी निगम में 44 सामान्य प्रत्याशी, 8 महिला एस.सी., 7 एस.सी. व 45 महिला और पूर्वी निगम में 26 सामान्य, 2 महिला एस.सी., 5 एस.सी. और 27 महिला सीटों को लिए मतदान कराया गया था। इन सीटों के लिए राष्ट्रीय स्तर की पार्टियों समेत बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे।
Tags:
national