योगी सरकार आते ही खुलने लगी लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के घोटाले की परतें



लखनऊ: उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे डेवलपमेंट इं​डस्ट्रियल अथॉरिटी (यूपीडा) के सीईओ नवनीत सहगल के पद से हटते ही लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के घोटालों के परतें खुलने लगी हैं। ताजा मामले में फिरोजाबाद की डीएम नेहा शर्मा ने जमीन के मुआवजे में घोटाले को लेकर चकबंदी अफसर समेत 27 अफसरों पर एफआईआर दर्ज कराई है। इसके बाद से एक्सप्रेस-वे के काम से जुड़े अफसर सकते मे हैं। मामला सिरसागंज तहसील के गांव बछेला-बछेली से जुड़ा है।
दरअसल, एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए साल 2013 में जमीन के अधिग्रहण का काम जोर-शोर से चल रहा था। उसी समय अफसरों ने कृषि भूमि को आबादी की भूमि दिखा दी। जिससे सरकार को मुआवजे के रूप में 3.92 करोड़ का ज्यादा भुगतान करना पड़ा।

यूपीडा के स्पेशल फील्ड ऑफिसर योगेश नाथ लाल ने पुलिस में यह शिकायत दर्ज कराई। एक्सप्रेस-वे के भूमि अधिग्रहण के लिए वर्ष 2013 में सात अक्टूबर और 30 दिसम्बर को नोटिफिकेशन किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि डीएम नेहा शर्मा को यह अनियमितता तब दिखाई दी, जब नवनीत सहगल को यूपीडा के सीईओ के पद से हटा दिया गया।

मुआवजे को लेकर उठाए गए थे सवाल
उस समय जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर सवाल उठाए गए थे। यहां तक आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए एक्सप्रेस—वे के डिजाइन से खिलवाड़ किया गया। मुआवजे में खूब खेल चला। पर सत्ताधारी दल के कानों तक इसकी आवाज नहीं पहुंची। तत्कालीन आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने इस परियोजना के कर्ताधर्ताओं पर सवाल खड़े किए थे। दरअसल माया सरकार के यमुना एक्सप्रेस वे के जबाब में सपा सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे बनाने की योजना बनाई। इसके लिए किसानों की जमीनें अधिग्रहीत की गईं।

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