गाँवों में नल की, तालाबों में जल की स्थिति हुई ख़राब


बाल गोविन्द वर्मा: सिरौलीगौसपुर, बाराबंकी।बतातें चलें कि सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र की अनेकों ग्राम पंचायतों में मुख्यमंत्री जल संरक्षण अभियान के तहत आदर्श जलाशय व अन्य मदों में बड़े पैमाने पर तालाबों की ख़ुदाई करायी गयी थी। जिसका उद्देश्य सिर्फ़ जल संग्रहण करना व ग्रामीण क्षेत्र के किसानों के पालतू जानवरों के पीने व स्नान करने हेतु जल उपलब्ध कराना था। सरकार ने इन जलाशयों के निर्माण में लाखों रूपये खर्च किये, लेकिन ये रुपये जो इन जलाशयों के निर्माण कार्य मे खर्च किये गये आज पूरी तरह से बर्बाद नजर आते हैं, क्योंकि गर्मी के शुरुआती दौर में ही जब ये जलाशय सूखे पड़े हैं तब आगे तो अभी और भी भयंकर गर्मी का सामना करना पड़ेगा। अब ऐसे में जब इंसान पानी-पानी करने लगता है तो फिर जानवरों का क्या होगा ?
         सरकार व प्रशासन द्वारा निर्धारित समय में ग्रामीण क्षेत्रों के इण्डिया मार्का हैंडपम्पों को बनवाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत अधिकारियों व सचिवों को सौंपी गई है। अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी ने सख़्त हिदायत दी है कि यदि किसी भी गाँव में कोई नल सात दिनों से अधिक समय तक ख़राब रहेगा तो तत्काल उस सम्बंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। सरकार की इतनी सख्ती के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों व अधिकारियों के ऊपर कोई असर नही पड़ता है। आज भी कई गाँवो के नल दो-तीन महीने से खराब पड़े हैं। भयंकर गर्मी पड़ने के बावजूद कोई इनका हाल लेने वाला नही है। ऐसे में सरकार के सभी दावे खोखले साबित हो रहे हैं और सब ढोल के भीतर पोल नजर आ रहा है।

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