नई दिल्ली: पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार और दिल्ली में राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव में आप उम्मीदवार की जमानत जब्त हो जाने के बाद केजरीवाल के लिए एक राहत की खबर आई है।
असल में उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग ने भारत निर्वाचन आयोग से मांग की है कि उन्हें मई में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव के लिए 2006 के बाद बनी ईवीएम मशीन उपलब्ध कराई जाए अन्यथा वह बैलेट पेपर से चुनाव कराना पसंद करेंगे।
बता दें कि चुनाव आयोग के ने उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग से पूछा था कि क्या वह 2006 से पहले बने ईवीएम मशीन से स्थानीय चुनाव कराना पसंद करेंगे तो जवाब में राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि वो इन मशीनों से चुनाव कराने के पक्ष मे नहीं हैं।
क्यों यूपी चुनाव आयोग है ईवीएम के खिलाफ
यूपी चुनाव आयुक्त एसके अग्रवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि प्रदेश में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव के लिए उन्हें नई ईवीएम मशीन उपलब्ध कराई जाए जो ठीक-ठाक स्थिति में हों अन्यथा इन चुनावों को बैलेट पेपर से कराने की उन्हें अनुमति मिलनी चाहिए।
इस जवाब के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वो प्रसन्न हैं कि यूपी चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा और मुझे उम्मीद है कि दिल्ली चुनाव आयोग भी ऐसा ही करेगा।
बता दें कि पंजाब में मिली हार के बाद केजरीवाल ने ईवीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा किया था जिसके बाद मध्यप्रदेश के भिंड में ईवीएम में गड़बड़ी का मामला सामने आया था।
कब होंगे यूपी में चुनाव
असल में उत्तर प्रदेश में शहरी निकायों के चुनाव की प्रक्रिया मई महीने से शुरू होकर जुलाई के दूसरे हफ्ते तक चलनी है। भारत चुनाव आयोग ने इन चुनावों में मतदान के लिए राज्य सरकार से 2006 से पहले बनी मशीनों के प्रयोग के बारे में सलाह मांगी थी।
वर्तमान में यूपी में चुनाव आयोग वार्डों के सीमांकन के कार्य में लगा हुआ है। यूपी में पिछले स्थानीय निकाय चुनाव 2012 में हुए थे। प्रदेश में कुल 12 नगर निगम सहित 194 नगर पालिका परिषदें और 423 नगर पंचायतें हैं।
देखना दिलचस्प होगा कि यूपी इलेक्शन कमीशन के जवाब के बाद निर्वाचन आयोग क्या यूपी को नए ईवीएम उपलब्ध कराता है या बैलेट पेपर से मतदान करने की अनुमति देता है।
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