धार्मिक अंधविश्वास नही बल्कि सच्ची आस्था का केंद्र है, कोटवाधाम


रिपोर्टर- बाल गोविन्द वर्मा।
सिरौलीगौसपुर, बाराबंकी।बाराबंकी की सरजमीं पर एक से बढ़कर एक संत महन्तों ने जन्म लिया है, जिसमें बाबा जगजीवन दास कोटवाधाम, हाजी वारिस अली शाह देवां शरीफ़, प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल किंतूर, अलौकिक व अद्वितीय वृक्ष पारिजात, लोधेश्वर महादेव महादेवा आदि प्रमुंख हैं। इन सब प्रमुंख स्थलों में बाबा जगजीवन साहेब की जन्मभूमि सरदहा के निकट उनकी कर्मभूमि कोटवाधाम जो आज एक ग्रामीण तीर्थस्थल के रूप में विकसित है कि हालत काफ़ी ख़राब है। कोटवाधाम में बाबा के दर्शन करने आज भी बड़ी दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। उनकी मान्यता है कि बाबा के दर्शन मात्र से जीवन धन्य हो जाता है।


         लेक़िन ये क्या जिस सरोवर में श्रद्धालु बड़े विश्वास से स्नान किया करते थे, जिस सरोवर का जल दो-दो बार दूध की तरह हो चुका है, उसकी हालत अत्यन्त दयनीय है। पूरे सरोवर(अभरन)के जल में काई लगी हुई है और जलस्तर काफी घटने के साथ ही कूड़ा करकट आदि सब कुछ इसी में डाल दिया जाता है, जिसकी वजह से अब कोई स्नान करना तो दूर हाथ मुँह भी नहीं धुलना चाहता है।
        आज पूरी तरह से यह आस्था का केंद्र गंदगी की चपेट में आ गया है। जबकि आज भी बहुत बड़ी संख्या में कार्तिक पूर्णिमा, रामनवमी तथा जन्मसप्तमी आदि अवसरों पर श्रद्धालु यहां आते हैं।

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