हलक से निवाला भी नहीं उतरा कि गोलियां बरसा दीं, छह घंटे लड़ते रहे जवान

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  • सुबह 06:00 बजे सोमवार सुबह 90 सीआरपीएफ के जवान सड़क सुरक्षा के लिए निकले
  • 12:30 बजे दोपहर जैसे ही जवान खाना खाने के लिए बैठे, नक्सलियों ने हमला बोल दिया
  • 03:30 बजे अपराह्न् तक गोलीबारी चलती रही, करीब 4 बजे मदद को हेलीकॉप्टर आया

सौ से अधिक महिला नक्सलियों ने सोमवार को हुए हमले को अंजाम दिया। पहली बार सेना की वर्दी में एके-47 लिए महिला नक्सलियों ने तीन ओर से जवानों को घेरकर ताबड़तोड़ गोलीबारी की। बाकी नक्सलियों ने पीछे से उन्हें सुरक्षा कवर दिया। हमले में घायल जवानों ने बताया कि नक्सलियों ने हमले की कमान तीन स्तर में बनाई थी। तीसरे नंबर पर भी सादे वेश में महिला नक्सली थी। ये हमले के बाद शहीद जवानों के पर्स, मोबाइल और हथियार लूट ले गईं। खुफिया पुलिस की मानें तो पिछले साल नक्सलियों ने मिलिट्री कमांड का पुनगर्ठन किया था। इसमें 2000 से अधिक महिला नक्सलियों को भर्ती किया गया था। इससे पहले पोलवरम हमले में महिला नक्सलियों की संख्या बराबर थी

हलक से निवाला भी नहीं उतरा कि गोलियां बरसा दीं : सीआरपीएफ के 90 जवान गश्त करते हुए बुर्कापाल पहुंचे थे। थकान मिटाने के लिए जवानों ने वहां पर रुकने का फैसला लिया। कुछ जवान पेड़ों की छांव में बैठ गए तो कुछ ने साथ लाए खाने को खाना शुरू किया। तभी अचानक गोलियां बरसने लगीं। सात साल पहले भी ताड़मेटला में भी थकान मिटा रहे जवानों को निशाना बना गया था।

छह घंटे लड़ते रहे जवान : हमले के समय अधिकांश जवान पैदल चल रहे थे। सीआरपीएफ के सूत्र बताते हैं कि करीब छह घंटे तक दो कंपनियां डेल्टा एवं चार्ली (लगभग डेढ़ सौ जवान) नक्सलियों से लड़ती रही। जवानों को न तो हेलीकॉप्टर की मदद मिली और न ही एमपीवी मौके पर पहुंच सके। हमले की सूचना मिलने के बाद एक एमपीवी घटनास्थल के लिए रवाना किया गया जो डेढ़ घंटे में पहुंचा। एक एमपीवी में 12 जवान बैठ सकते हैं। पहले दो चक्करों में इसमें 30-30 जवानों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया गया।

एक एमपीवी के छह चक्कर : उसने बेस कैंप से लेकर घटनास्थल तक के करीब छह चक्कर लगाए। नक्सलियों ने इस वाहन पर भी भारी फायरिंग की, लेकिन इसमें बैठे जवान सुरक्षित रहे। एमपीवी ने पहले दो चक्करों में जवानों को मौके पर पहुंचाया, उसके बाद एक चक्कर में गोला-बारूद एवं हथियार घटनास्थल पर पहुंचाए गए। घायलों को अस्पताल या सुरक्षित जोन तक लाने के लिए भी इसी वाहन की मदद ली गई।

शहीदों में बिहार के छह और यूपी के दो जवान
हेड कांस्टेबल केपी सिंह, गांव डांडी, एटा, उत्तर प्रदेश’ कांस्टेबल मनोज कुमार, गांव निरगंजानी, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश’ कांस्टेबल नरेश यादव, गांव अहिला, दरभंगा, बिहार’ कांस्टेबल सौरभ कुमार, दानापुर कैंट, पटना, बिहार ’ कांस्टेबल अभय मिश्र, गांव तुलसी, भोजपुर, बिहार’ कांस्टेबल कृष्ण कुमार पांडेय, गांव भरंदुआ, रोहतास, बिहार’ कांस्टेबल अभय कुमार, गांव लोमा, वैशाली, बिहार’ कांस्टेबल रंजीत कुमार, गांव फूलचौड़, अरियारी, शेखपुरा बिहार’ कांस्टेबल आशीष कुमार सिंह, गांव गरनाहा, पो तोलड़ा, गढ़वा, झारखंड’ कांस्टेबल बनमाली राम, गांव धौरासंड, जसपुर, छत्तीसगढ़(शहीदों में तमिलनाडु के चार, पश्चिम बंगाल के तीन, हरियाणा, हिमाचल, राजस्थान के दो-दो, पंजाब और एमपी के एक-एक जवान शामिल है।)
सोमवार को ही राज्य के दंतेवाड़ा जिले में बम निरोधक दस्ते ने नक्सलियों द्वारा लगाए गए 10 किलो आरडीएक्स को निष्क्रिय किया था। नहीं तो यहां भी बड़ा हादसा हो सकता था।

सीएम रमन की आपात बैठक
सुकमा में नक्सली हमले की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री रमन सिंह दिल्ली दौरा बीच में छोड़कर रायपुर पहुंचे। उन्होंने हालात की समीक्षा के लिए आपात बैठक भी बुलाई। रमन सिंह नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने दिल्ली आए थे।

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