मुलायम सिंह इज बैक, अखिलेश को याद दिलाया "आखिर बाप बाप होता है"



लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में हालिया विधानसभा चुनाव एक तूफान की तरह साबित हुए। बीजेपी के तूफान में सभी पार्टियों का जनाधार उड़ता दिखाई दिया। बीजेपी की जीत की संभावना करने वाले सियासी पंडित भी इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं कर रहे थे। बीजेपी को प्रचंड बहुमत के बाद विरोधी दल खुद हैरान हैं। उन्हे अब लग रहा है कि बीजेपी और मोदी को रोकने के लिए सभी को साथ आना होगा। गठबंधन या फिर महागठबंधन की सुगबुगाहट पिछले काफी समय से सुनाई दे रही है। यूपी में करारी हार के बाद अखिलेश यादव ने पहली बार गठबंधन को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर बीजेपी और मोदी के खिलाफ कोई गठबंधन बनता है तो समाजवादी पार्टी उसमें अहम भूमिका निभाएगी।

अखिलेश यादव की इस मंशा के बाद अब उनके पिता मुलायम सिंह का बयान सामने आया है। गठबंधन की राजनीति में मुलायम को भरोसा नहीं रहा है। यूपी चुनाव के दौरान भी उन्होंने अखिलेश को कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के रोकने की कोशिश की थी। लेकिन अखिलेश ने उनकी नहीं सुनी और नतीजा सबके सामने है। अब जब एक बार फिर से अखिलेश गठबंधन की बात कर रहे हैं तो मुलायम सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी किसी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। मुलायम ने गठबंधन की संभावना से इंकार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ने में समर्थ है। इस तरह से मुलायम सिंह ने अखिलेश को फिर से इस बात का अहसास कराया है कि वो अभी भी सपा के सबसे बड़े नेता हैं।

आपको बता दें कि अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा था कि बीजेपी के खिलाफ अगर गठबंधन बनता है तो समाजवादी पार्टी की उसमें अहम भूमिका होगी। अखिलेश के इस बयान के बाद फिर से मोदी के खिलाफ महागठबंधन की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बता दें कि अखिलेश से पहले बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भी गठबंधन की तरफ इशारा किया था. उन्होंने कहा था वो बीजेपी और मोदी को रोकने के लिए किसी से भी हाथ मिला सकती हैं। माया ने कहा था कि बीजेपी धांधली करके चुनाव जीती है। ईवीएम और बीजेपी के खिलाफ संघर्ष में अगर विरोधी दल हमारे साथ आना चाहते हैं तो हमें उनसे हाथ मिलाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। मायावती और अखिलेश के अलावा कांग्रेस भी गठबंधन के पक्ष में दिखाई दे रही है।

अखिलेश यादव ने कहा था कि हमारी पार्टी सबका स्वागत करती है। हमने पहले भी स्वागत किया है। लेकिन उस समय मनचाहे नतीजे नहीं आए थे। बता दें कि यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने गठबंधन किया था। कांग्रेस और सपा को कुल 54 सीटें मिली थी। वहीं बीएसपी को 19 सीटों से संतोष करना पड़ा था। वहीं बीजेपी गठबंधन को कुल 325 सीटें मिली थी। पिछले लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने यूपी की 80 में से 73 सीटों पर जीत हासिल की थी। इन आंकड़ों को देखते हुए अब विरोधी दल अकेले बीजेपी और मोदी का मुकाबला करने से बच रहे हैं। देखना होगा कि महागठबंधन बनता है या नहीं, अगर बनता है तो उसका नेता कौन होगा और उस से बड़ा सवाल ये है कि क्या अखिलेश अपने पिता की सलाह इस बार मानेंगे।

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