कवरेज इण्डिया स्पेशल रिपोर्ट: अंबेडकर जयंती पर सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि...



एस तरफ जहां पूरा देश शुक्रवार को बाबा साहेब अंबेडकर की 126वीं जयंती बना रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर पहुंचकर कई कार्यक्रम में हिस्सा लेकर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी. नहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रही है, जिसमें कुछ महिलायें अंबेडकर जंयती पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को माला चढ़ाकर श्रद्धांजलि दे रही हैं.

बताया जा रहा है कि यह तस्वीर उत्तर प्रदेश के हरदोई की है, जहां पर एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापक जयंती मना रहे थे, लेकिन उन्होंने तस्वीर सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर लगा रखी थी. हालांकि, तस्वीर में दिख रहा है कि पीछे बोर्ड पर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि के बारे में ही लिखा है.तो दूसरी व तीसरी फोटो में अंबेडकर की फोटो तो है पर उनका नाम सही नहीं लिखा गया है।ऐसे में सवाल सिर्फ यही उठ रहा है कि क्या ऐसे शिक्षक देश का भविष्य सुधार सकते हैं ?


आइयेगा हम आपको बताते हैं कि कब कब और कहां हुई ऐसी गलतियां।

मोदी-शिवराज की फोटो पर भी चढ़ी थी माला
इससे पहले इंदौर की मेयर मालिनी गौड़ ने एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तस्वीर पर फूलों की माला चढ़ा दी. तस्वीर के वायरल होने से बवाल बढ़ने के बाद बीजेपी विधायक जीतू पटवारी ने कहा था कि जिसने भी पीएम और मुख्यमंत्री की तस्वीर पर माला चढ़ाई है, उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बीजेपी की सदस्य होने के बावजूद उनसे इस प्रकार की गलती होना चौंकाने वाला है.
पहले कलाम की फोटो पर चढ़ी थी माला



इससे पहले झारखंड सरकार की शिक्षा मंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की तस्वीर पर माला चढ़ा दी थी. उस समय अब्दुल कलाम जीवित थे.

एक हफ्ते बाद हुई थी कलाम की मौत
शिक्षा मंत्री नीरा यादव के जीवित कलाम की फोटो पर माला चढ़ाने के एक हफ्ते बाद ही अब्दुल कलाम की मृत्यु हो गई थी. एक हफ्ते बाद कलाम की मौत की खबर नीरा यादव के लिए सदमा लेकर आई.काफी देर तक तो नीरा को इस खबर पर यकीन ही नहीं हुआ था.

अटल बिहारी वाजपेयी की फोटो पर भी चढ़ी थी फोटो
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की फोटो पर भी माला चढ़ाने का मामला सामने आ चुका है. वाजपेयी अभी जीवित हैं. हालांकि उनकी तबीयत काफी समय से खराब रहती है. पिछले कुछ समय से वह 2004 का चुनाव हारने के बाद उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया था.

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