
नई दिल्ली। इंजिनियर शाम को ध्यान में रमा हुआ था तभी एक सहकर्मी ने उसे फोनकर टीवी ऑन करने को कहा। प्रधानमंत्री कह रहे थे कि भारत का ज्यादा कैश सुबह से किसी काम का नहीं रहेगा।
इसका उद्देश्य देश को 'काले धन' से मुक्त कराना था जिसके लिए कोई टैक्स नहीं दिया गया। अवैध गतिविधियों जैसे रिश्वत में इस्तेमाल होने वाला धन अक्सर ब्लैक मनी होता है। इंजिनियर के बेडरूम में एक लोहे के बक्से में 4 करोड़ 80 लाख रुपए रखे हुए थे।
नाम ना बताने की शर्त पर इंजिनियर ने असोसिएटेड प्रेस से कहा कि पहले कुछ मिनटों तक तो मैं कुछ भी नहीं समझ पाया। इंजिनयर उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग में कार्यरत है और उसके तमाम सहकर्मियों ने भी रिश्वत के जरिए बड़ी मात्रा में कैश जुटाए हुए हैं। उन्हें सरकारी ठेकों के बदले रिश्वत मिलती है और यह बात इतनी सामान्य है कि तमाम लोगों ने तो इसे भारत में बिजनेस करने के लिए एक अघोषित शर्त के तौर पर स्वीकार कर लिया है। अब उन्हें कुछ भी सूझ नहीं रहा, सरकार के इस कदम से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
इंजिनियर ने कहा कि सरकारी नौकरी में रिश्वत लेने में कोई बुराई नहीं है। नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को अपने टीवी संबोधन में 500 और 1,000 रुपए के नोटों को तत्काल प्रभाव से अमान्य करने का ऐलान किया था। इससे देश की 86 फीसदी मुद्रा तत्काल प्रभाव से अमान्य हो गई। उन्होंने कहा कि इससे भ्रष्टाचार मिटेगा, हालांकि देश की 130 करोड़ की आबादी में बहुत सारे लोगों के पास बैंक अकाउंट नहीं है, इससे वैध तरीके से भी जमा की गई मुद्रा बेकार हो सकती है।
जब इंजिनयर से यह पूछा गया कि क्या उसे रिश्वत लेने पर शर्म महसूस होती है या अपराधबोध होता है तो उसका जवाब था नहीं। उसने कहा कि कमिशन के रूप में ऐक्स्ट्रा मनी लेना जरूरत बन चुकी है। उसने बताया कि हर फेस्टिव सीजन में उससे उम्मीद की जाती है कि वह अपने बड़े अफसरों को महंगी घड़ियां, सूट, सोने की चेन गिफ्ट में दें। यहां तक कि हमसे सीनियर्स के बेटों के लिए भी गिफ्ट की उम्मीद की जाती है। उसने आगे कहा कि उनको खुश रखना होता है...लेकिन क्या आप ये उम्मीद करते हैं कि मैं उन गिफ्ट्स को अपनी सैलरी से दूं? नहीं, कभी नहीं।
इंजिनियर ने बताया कि आपको रिश्वत मांगने की जरूरत नहीं पड़ती। सड़क निर्माण जैसे प्रॉजेक्ट्स के कमिशन पहले से ही तय हैं और वह उसी को स्वीकार करता है। उसने कहा कि टेंडर से लेकर प्रॉजेक्ट्स के पूरा होने तक करीब-करीब हर चरण में रिश्वत बंधा हुआ है। 'कमिशन' से करीब-करीब हर किसी को फायदा मिलता है चाहे बड़ा से बड़ा मंत्री हो या कोई अधिकारी।
अपने ठीक-ठाक घर के नजदीक एक आलीशान घर की तरफ इशारा करते हुए इंजिनियर ने कहा कि मुझे जो रिश्वत मिलती है वो दूसरों के मुकाबले कुछ नहीं है। मेरे पास एक छोटी से हैचबैक कार है जबकि दूसरे सेडान और एसयूवी में घूमते हैं। क्या हमारे सीनियर्स का इस पर ध्यान नहीं जाता?
भारत में रिश्वतखोरी अब इतना सामान्य है कि इसे खुलेआम लिया जाने लगा है। 4 सितंबर को अशोक कुमार नाम के यूपी के एक अधिकारी ने अपने शहर बस्ती में पत्रकारों से कहा था कि वह जिलाधिकारी इसलिए नहीं बन सके क्योंकि उनके पास रिश्वत देने के लिए 70 लाख रुपए नहीं थे। इस बयान के बाद कुमार को निलंबित कर दिया गया, हालांकि उन्होंने कभी भी यह नहीं बताया कि उनसे रिश्वत कौन मांग रहा था। रिटायर्ड नौकरशाह एसपी सिंह 30 साल से ज्यादा वक्त तक सिविल सर्विस में रहे, लेकिन भ्रष्टाचार से वह भी निराश है। उन्होंने कहा कि नेता और नौकरशाह मिलकर रिश्वत को गोपनीय बनाए रखते हैं। वह कहते हैं कि एक नौकरशाह किसी अनपढ़ नेता की पैसे बनाने में मदद करता है। ऐसे करते हुए वह ये सोचने लगता है कि जब मंत्री पैसे बना सकता है तो वह क्यों नहीं।
अभी इस पर संदेह है कि नोटबंदी भ्रष्टाचार या टैक्स चोरी के खिलाफ वास्तव में असर करेगा या नहीं। भारत में काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था कुछ इस कदर है कि देश की जीडीपी का ये करीब एक चौथाई है। किसी ने सोना खरीद रखा है तो किसी ने डॉलर और यूसो। कुछ ने मकानों की खरीदने में कैश लगाया है। रीयल एस्टेट सेक्टर में खूब कैश लगा है। शुरुआती डर के बावजूद इंजिनियर ने कहा कि एक बार जब नए नोट पर्याप्त मात्रा में आ जाए तो वह भी अपने पास मौजूद धन को खपाने का कोई तरीका ढूढ़ निकालेगा।
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